ऋषिकेश :
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में चार दिवसीय रिसर्च मैथोडोलॉजी एंड एविडेंस बेस्ड मेडिसिन विषय पर आधारित चिकित्सा विषय पर चार दिवसीय कार्यशाला विधिवत शुरू हो गई। कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने व्याख्यानमाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुसंधान की जरुरत और अनुसंधान के तौर तरीके, रिसर्च की प्रोसेस व विश्लेषण संबंधित जानकारियां दी। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को अब तक हुए रिसर्च के मूल्यांकन संबंधी तौर तरीके भी बताए। बताया गया कि अब तक किए गए अनुसंधान की संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद ही नए रिसर्च के बिंदु तय किए जाने चाहिंए, तभी मरीजों को उसका लाभ मिल सकता है। एम्स की ओर से आयोजित एविडेंस बेस्ड मेडिसिन (ईबीएम) विषय पर आयोजित कार्यशाला में अपने संदेश में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने एमबीबीएस से लेकर एमडी,एमएस,डीएम, एमसीएच, नर्सिंग स्टूडेंट्स, पीएचडी स्तर तक साक्ष्य आधारित चिकित्सा को अनिवार्य बताया। उन्होंने बताया कि मेडिसिन की प्रैक्टिस का आधार एविडेंस बेस्ड होना चाहिए ,तभी मरीज को उपयुक्त उपचार मिल सकता है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध अनुसंधान इसको बढ़ावा देता है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स संस्थान में अनुसंधानकर्ताओं के लिए हर तरह के बेहतर रिसर्च की हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध हैं,जिससे मरीजों को सर्वश्रेष्ठ उपचार मिल सके। लिहाजा चिकित्सकों को लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए रिसर्च के लिए आगे आना चाहिए। कार्यशाला में डीन रिसर्च प्रो. प्रतिमा गुप्ता व डा. रंजीता कुमारी ने रिसर्च के विषय,डा. तरुण गोयल ने लिट्रेचर सर्च,डा. वर्तिका सक्सेना ने अनुसंधान के तौर तरीके व पुनीत धमीजा ने रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल (आरसीटी) की जानकारी दी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पाइनल इंजरीज की हेड ऑफ बायोस्टेटिस्टिक्स डा. गायत्री विश्वकर्मा ने रिसर्च में डाटा तैयार करने व विश्लेषण के तौर तरीकों की विस्तृत जानकारी दी। डा. राजेश काथरोटिया ने रिसर्च के लिए सॉफ्टवेयर के उपयोग के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने बताया कि रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल से नई दवा, उसकी पद्धति व उसके कार्य करने की क्षमता आदि तकनीकी जानकारी संभव है। डा. अनुपमा बहादुर व डा. पुनीत धमीजा ने प्रतिभागियों को ट्रायल के मैनेजमेंट के तरीके बताए। उन्होंने ईबीएम में रिसर्च को समझने, उसके प्रकारों और उसके अध्ययन से मरीजों पर इस्तेमाल संबंधी जानकारियां दी। डा. प्रतिमा गुप्ता, प्रो. शालिनी राव, डा. वर्तिका, डा. वेंकटेश पाई,डा. तरुण गोयल, डा. मनीषा बिष्ट ने उन्हें रिसर्च के मूल्यांकन के तौर तरीके व अब तक के रिसर्च के निष्कर्ष संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी। कार्यशाला में एम्स के विभिन्न विभागों के फैकल्टी, पीएचडी,एमडी, डीएम, एमएस, एमसीएच स्टूडेंट्स व नर्सिंग फैकल्टी व नर्सिंग ट्यूटर प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रो. सुधीर सक्सेना, प्रो.मोहम्मद कमर आजम, डा. रवि गुप्ता,डा. हरीश चंद्रा,डा. प्रशांत वर्मा, डा. सुमित सान्याल,डा. राकेश शर्मा, डा. अंजुम सय्यद, डा. योगेश बहुरूपी, डा. जितेंद्र रोहेला, डा. कविता खोईवाल,डा. राजलक्ष्मी मुंदरा,डा. दलजीत कौर आदि मौजूद थे।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में चार दिवसीय रिसर्च मैथोडोलॉजी एंड एविडेंस बेस्ड मेडिसिन विषय पर आधारित चिकित्सा विषय पर चार दिवसीय कार्यशाला विधिवत शुरू हो गई। कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने व्याख्यानमाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुसंधान की जरुरत और अनुसंधान के तौर तरीके, रिसर्च की प्रोसेस व विश्लेषण संबंधित जानकारियां दी। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को अब तक हुए रिसर्च के मूल्यांकन संबंधी तौर तरीके भी बताए। बताया गया कि अब तक किए गए अनुसंधान की संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद ही नए रिसर्च के बिंदु तय किए जाने चाहिंए, तभी मरीजों को उसका लाभ मिल सकता है। एम्स की ओर से आयोजित एविडेंस बेस्ड मेडिसिन (ईबीएम) विषय पर आयोजित कार्यशाला में अपने संदेश में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने एमबीबीएस से लेकर एमडी,एमएस,डीएम, एमसीएच, नर्सिंग स्टूडेंट्स, पीएचडी स्तर तक साक्ष्य आधारित चिकित्सा को अनिवार्य बताया। उन्होंने बताया कि मेडिसिन की प्रैक्टिस का आधार एविडेंस बेस्ड होना चाहिए ,तभी मरीज को उपयुक्त उपचार मिल सकता है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध अनुसंधान इसको बढ़ावा देता है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स संस्थान में अनुसंधानकर्ताओं के लिए हर तरह के बेहतर रिसर्च की हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध हैं,जिससे मरीजों को सर्वश्रेष्ठ उपचार मिल सके। लिहाजा चिकित्सकों को लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए रिसर्च के लिए आगे आना चाहिए। कार्यशाला में डीन रिसर्च प्रो. प्रतिमा गुप्ता व डा. रंजीता कुमारी ने रिसर्च के विषय,डा. तरुण गोयल ने लिट्रेचर सर्च,डा. वर्तिका सक्सेना ने अनुसंधान के तौर तरीके व पुनीत धमीजा ने रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल (आरसीटी) की जानकारी दी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पाइनल इंजरीज की हेड ऑफ बायोस्टेटिस्टिक्स डा. गायत्री विश्वकर्मा ने रिसर्च में डाटा तैयार करने व विश्लेषण के तौर तरीकों की विस्तृत जानकारी दी। डा. राजेश काथरोटिया ने रिसर्च के लिए सॉफ्टवेयर के उपयोग के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने बताया कि रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल से नई दवा, उसकी पद्धति व उसके कार्य करने की क्षमता आदि तकनीकी जानकारी संभव है। डा. अनुपमा बहादुर व डा. पुनीत धमीजा ने प्रतिभागियों को ट्रायल के मैनेजमेंट के तरीके बताए। उन्होंने ईबीएम में रिसर्च को समझने, उसके प्रकारों और उसके अध्ययन से मरीजों पर इस्तेमाल संबंधी जानकारियां दी। डा. प्रतिमा गुप्ता, प्रो. शालिनी राव, डा. वर्तिका, डा. वेंकटेश पाई,डा. तरुण गोयल, डा. मनीषा बिष्ट ने उन्हें रिसर्च के मूल्यांकन के तौर तरीके व अब तक के रिसर्च के निष्कर्ष संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी। कार्यशाला में एम्स के विभिन्न विभागों के फैकल्टी, पीएचडी,एमडी, डीएम, एमएस, एमसीएच स्टूडेंट्स व नर्सिंग फैकल्टी व नर्सिंग ट्यूटर प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रो. सुधीर सक्सेना, प्रो.मोहम्मद कमर आजम, डा. रवि गुप्ता,डा. हरीश चंद्रा,डा. प्रशांत वर्मा, डा. सुमित सान्याल,डा. राकेश शर्मा, डा. अंजुम सय्यद, डा. योगेश बहुरूपी, डा. जितेंद्र रोहेला, डा. कविता खोईवाल,डा. राजलक्ष्मी मुंदरा,डा. दलजीत कौर आदि मौजूद थे।
.png)

एक टिप्पणी भेजें