रुद्रप्रयाग;
भूपेंद्र भंडारी
ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के दरबार में आए देश-विदेश के दर्शनार्थी केदारनाथ बाबा के बिना दर्शन के ही वापस आ रहे हैं। राजस्थान, हरियाणा, बंगाल, केरला, दिल्ली समेत कई राज्यों से आए यात्रियों ने केदारनाथ में प्रशासन के प्रबन्धन पर गम्भीर सवाल खड़े किये हैं। चलिए दिखाते हैं ये रिपोर्ट-
वर्ष 2013 की आपदा के बाद उत्तराखण्ड की सरकार और केन्द्र सरकार ने केदारनाथ धाम के पुननिर्माण को लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया और साल दर साल केदारपुरी को भव्य रूप् दिया गया। जिस कारण केदारनाथ में आपदा के मंजर को ही चंद सालों में लोग के दिलों से खत्म कर दिया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लगातार चार बार केदारनाथ आने से भी देश-विदेश के तीर्थ यात्रियों की भारी तादात यहां पहुँच रही है। पिछले वर्ष करीब साढ़े सात लाख तीर्थ यात्रियों ने यहां पहुँचकर केदारनाथ के इतिहास में सार्वाधिक यात्री आने का रिकार्ड दर्ज किया थां। जबकि इस वर्ष भी केदारनाथ में यात्रियों की संख्या एक माह में करीब साढ़े चार लाख के पार पहुंच गई हैं। लेकिन सरकार और जिला प्रशासन की यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के दावों की कलई यात्रा आरम्भ होने के साथ ही खुलती हुई नजर आ रही थी और ज्यों ज्यों यात्रा बढ़ी यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ती गई। केदारनाथ में वीआईपी दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा कठिनायों का सबस बना हुआ है। जिस कारण आधे से ज्यादा तीर्थ यात्रियों को बिना दर्शन के ही वापस आना पढ़ रहा है।
- दरअसल केदारनाथ धाम में मंदिर समिति के साथ ही पंडा समाज और तीर्थ पुरोहितों द्वारा हेली से जाने वाले वीआईपी श्रद्धालुओं को पीछे के रास्ते से पहले दर्शन दिया जा रहा है। जबकि रूद्राभिषेक जैसी कई पूजाओं में अधिक पैंसे लेकर आधा घंटे तक पूजा करवाई जा रही है जिस कारण अधिक समय लग रहा है और मुख्य दरवाजे पर लाइन में लगे हजारों आम श्रद्धालुओं का नम्बर आने में भारी वक्त लग रहा है। पिछले कई सालों से वीआईपी कल्चर खत्म करने की मांग की जा रही है लेकिन यह खत्म नहीं हो पा रही है जिस कारण कई श्रद्धालुओं को निराश वापस जाना पड़ रहा है।
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