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ऋषिकेश;

एम्स ऋषिकेश में आयोजित डायबिटीज एजुकेटर सर्टिफिकेट कोर्स के तीसरे दिन प्रतिभागियों को मधुमेह रोग के कारण, बचाव व आवश्यक सावधानी का प्रशिक्षण दिया गया। छह दिवसीय उच्चस्तरीय प्रशिक्षण में मेडिकल आफिसर, चिकित्सक व नर्सिंग की छात्राएं प्रतिभाग कर रही हैं। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को  मुख्य अतिथि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. ब्रह्मप्रकाश ने बच्चों में होने वाली मधुमेह की उपचार विधि का प्रशिक्षण दिया।


नेत्र विभागाध्यक्ष डा. संजीव कुमार मित्तल ने मधुमेह के कारण आंखों में होने वाले नुकसान से बचाव व उपचार संबंधी जानकारी दी। न्यूरोलॉजी विभाग की डा. ऋतुश्री ने बताया कि 20.वर्ष के बाद मधुमेह से ग्रसित 80 प्रतिशत रोगियों में आंखों की रोशनी कम होना, मोतियाबिंद व अन्य तरह के विकार होने लगते हैं। उन्होंने मधुमेह से तंत्रिका तंतुओं में होने वाली हानि और इससे बचाव की जानकारी दी।बताया गया कि मधुमेह ग्रस्त रोगियों का शुगर लेवल लगातार बढ़ने की स्थिति में पैरों व हाथों में ज्यादा गर्मी व अत्यधिक ठंडा लगने आदि लक्षण पाए जाते हैं।
मेडिसिन विभाग की डा.निधि ने मधुमेह के कारण गुर्दों में होने वाली बीमारी व उसके उपचार का प्रशिक्षण दिया। मनोरोग विभागाध्यक्ष डा.रवि गुप्ता ने बताया कि बहुत कम सोने व अत्यधिक सोने वाले लोगों के साथ ही जिन लोगों को सोते समय खर्राटे आते हैं ऐसे लोगों को शुगर की जांच अवश्य करानी चाहिए। मेडिसिन विभाग के डा. मुकेश कुमार ने अचानक शुगर लेवल बढ़ने की स्थिति में बचाव व उपचार का प्रशिक्षण दिया।

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