उत्तरकाशी:
चिरंजीव सेमवाल
न कुरीति और ना ही अंधविश्वास. आप जानकर चौंक जायेंगे कि आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के बाद भी प्रखंड पुरोला के सुदूरवर्ती सरबडियार के आठ गांव आज भी देश दुनिया से अलग-थलग पडा है। सरकार के
विकास योजनाऐं से इस क्षेत्र अभी कोषों दूर है। यहां सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा ,दूरसंचार एवं पोस्ट ओफिस भी नसीब नहीं है। जिस कारण यहां लोग अपनी बेटी को भी नहीं ब्याता है।गजब तो यह है कि दस वर्षों में मात्र 03 किमी सड़क बनी है गौरतलब है कि राज्य गठन के 18 वर्ष बाद भी 30 किमी दूर लोग पैदल चलने
को मजबूर है। तहसील पुरोला के सुदूरवर्ती आठ गांव सबडियार सर गांव, लेवटाडी,डिगाडी,किमडार, पौन्टी, कसलों,छानिका और गोल गांव की हजारों आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सर गांव की हजारों की ग्राम प्रधान एलमा ज्याडा ने पत्रकारों को बताया कि सरबडियार के लिये गंगटाडी
-सरनौल मोटर मार्ग से सडक जोने के लिये 10 साल पहले निविदा हुई थी, वो भी कछुआ चाल से बन रही पिछले 10 वर्षों में महज 3 किलों मी. सड़क बनी है।
उक्त गांव में सड़क मार्ग से न होने से यहां के के युवकों को शादी करना मुश्किल हो जाता है। लड़की के मायके के लोग उनको इस शर्त पर लडकी ब्याहता है की यदि पुरोला में मकान बना है तबी शादी की बात आगे बढेगी। इस का प्रभाव कुछ हुआ भी कुछ यूं कि लोग पलायन करने को मजबूर है। सरबडियार के 50 प्रतिशत लोगों ने यहां पलायन कर रामा सेरांई में बस गये है।
बता दे कि स्वास्थ्य के नाम 1980 के दशक में एक ऐलोपैथिक अस्पताल तो है ,लेकिन डाॅक्टर नहीं हैं कभी -कभी फार्मेसिस्ट के दर्शन जरूर हो जाते है। शिक्षा के नाम पर यहां कक्षा आठ तक ही हैं इसके बाद यहां बच्चओं को मिलो पैदल दूर जाना पडता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने जरूर आते हें. लेकिन चुनाव जीतने के बाद कभी क्षेत्र में लौट के नही आये।
गांव के लोगों ने हेलीकॉप्टर पहली बार लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक वोट मांगने आये थे। उसके बाद राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने इस क्षेत्र का भ्रमण किया लेकिन क्षेत्र का विकास राज्यसभा सांसद भी नही कर पाये। क्षेत्र में दूरसंचार तो दूर डाकखाना भी नसीब नहीं बल्कि नौगंाव विकासखंड के सरनौल गांव में आठ गांव के लोगों का डाकखाना है। यहां के लोगों को व्हाट्सएप एवं फेसबुक के युग में महीनो तक चिट्ठियों का इंतजार करना पडता है।
चिरंजीव सेमवाल
न कुरीति और ना ही अंधविश्वास. आप जानकर चौंक जायेंगे कि आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के बाद भी प्रखंड पुरोला के सुदूरवर्ती सरबडियार के आठ गांव आज भी देश दुनिया से अलग-थलग पडा है। सरकार के
विकास योजनाऐं से इस क्षेत्र अभी कोषों दूर है। यहां सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा ,दूरसंचार एवं पोस्ट ओफिस भी नसीब नहीं है। जिस कारण यहां लोग अपनी बेटी को भी नहीं ब्याता है।गजब तो यह है कि दस वर्षों में मात्र 03 किमी सड़क बनी है गौरतलब है कि राज्य गठन के 18 वर्ष बाद भी 30 किमी दूर लोग पैदल चलने
को मजबूर है। तहसील पुरोला के सुदूरवर्ती आठ गांव सबडियार सर गांव, लेवटाडी,डिगाडी,किमडार, पौन्टी, कसलों,छानिका और गोल गांव की हजारों आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सर गांव की हजारों की ग्राम प्रधान एलमा ज्याडा ने पत्रकारों को बताया कि सरबडियार के लिये गंगटाडी
-सरनौल मोटर मार्ग से सडक जोने के लिये 10 साल पहले निविदा हुई थी, वो भी कछुआ चाल से बन रही पिछले 10 वर्षों में महज 3 किलों मी. सड़क बनी है।
उक्त गांव में सड़क मार्ग से न होने से यहां के के युवकों को शादी करना मुश्किल हो जाता है। लड़की के मायके के लोग उनको इस शर्त पर लडकी ब्याहता है की यदि पुरोला में मकान बना है तबी शादी की बात आगे बढेगी। इस का प्रभाव कुछ हुआ भी कुछ यूं कि लोग पलायन करने को मजबूर है। सरबडियार के 50 प्रतिशत लोगों ने यहां पलायन कर रामा सेरांई में बस गये है।
बता दे कि स्वास्थ्य के नाम 1980 के दशक में एक ऐलोपैथिक अस्पताल तो है ,लेकिन डाॅक्टर नहीं हैं कभी -कभी फार्मेसिस्ट के दर्शन जरूर हो जाते है। शिक्षा के नाम पर यहां कक्षा आठ तक ही हैं इसके बाद यहां बच्चओं को मिलो पैदल दूर जाना पडता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने जरूर आते हें. लेकिन चुनाव जीतने के बाद कभी क्षेत्र में लौट के नही आये।
गांव के लोगों ने हेलीकॉप्टर पहली बार लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक वोट मांगने आये थे। उसके बाद राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने इस क्षेत्र का भ्रमण किया लेकिन क्षेत्र का विकास राज्यसभा सांसद भी नही कर पाये। क्षेत्र में दूरसंचार तो दूर डाकखाना भी नसीब नहीं बल्कि नौगंाव विकासखंड के सरनौल गांव में आठ गांव के लोगों का डाकखाना है। यहां के लोगों को व्हाट्सएप एवं फेसबुक के युग में महीनो तक चिट्ठियों का इंतजार करना पडता है।
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