रुद्रप्रयाग:
भूपेंद्र भंडारी
जनपद इन दिनों रामभक्ति से रस में सरोबार है। जिले के अधिकांश हिस्सों में रामलीलाओं का भब्य मंचन किया जा रहा है। जिसको देखने के लिए रामभक्त दूर दराज के गांवों से बडी संख्या में पहुंच रहे हैं। इन लीलाओं से जहां पौराणिक विरासत को नई पीडी से रुबरु करवाने का एक पुण्य कार्य चल रहा है वहीं ये लीलाएं ग्रामीणों के आपसी सौहार्द व भाई-चारे को भी बडा रही हैं।
भूपेंद्र भंडारी
जनपद इन दिनों रामभक्ति से रस में सरोबार है। जिले के अधिकांश हिस्सों में रामलीलाओं का भब्य मंचन किया जा रहा है। जिसको देखने के लिए रामभक्त दूर दराज के गांवों से बडी संख्या में पहुंच रहे हैं। इन लीलाओं से जहां पौराणिक विरासत को नई पीडी से रुबरु करवाने का एक पुण्य कार्य चल रहा है वहीं ये लीलाएं ग्रामीणों के आपसी सौहार्द व भाई-चारे को भी बडा रही हैं।
अगस्त्यमुनि विकासखण्ड की सबसे बडी
ग्रामपंचायत बावई में भी इन दिनों रामलीला का मंचन किया जा रहा है। और वर्ष
1940 से लगातार इस गांव में एतिहासिक रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
आधुनिक्ता के दौर में जहां हर आयोजन महज खानापूर्ति बनते दिख रहे हैं वहीं
नई पीढ़ी के नौजवान बढ़चढ़ कर इन लीलाओं में प्रतिभाग कर लीला के किरदारों को
निभा रहे हैं और आने वाले दिनों में इन किरदारों को और भी व्यवस्थित तरीके
से निभाने की बात कर रहे हैं।
वहींभगत सिंह संरक्षक रामलीला कमेटी कुंवर सिंह गुसांई डायरेक्टर का कहना है कि आज भले ही समाज में आधुनिक्ता हावी
है बावजूद इसके नौजवान अपनी इस ऐतिहासिक लीला में तनमयता से किरदारों को
निभा रहे हैं। यही नहीं स्थानीय जनमानस का भी इन लीलाओं में पूरा सहयोग मिल
रहा है जो कि मौजूदा समय में एक बडी मिसाल है।
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जिले में उखीमठ, अगस्त्यमुनि, सिलगढ, नाला, नरकोटा, अपर बाजार, मुख्य बस
स्टैण्ड रुद्रप्रयाग के साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला का भब्य
आयोजन चल रहा है। मौजूदा दौर में जहां आम व्यक्ति के पास फुरसत के क्षण
नहीं हैं ऐसे में बडे पैमाने पर इस तरह के सामुहिक आयोजन कहीं ना कहीं
ग्रामीण क्षेत्रों की एकता व भाईचारे को प्रदर्शित करता है।
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