श्री
अश्विनी कुमार चौबे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री, भारत
सरकार ने कहा कि उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य देख-रेख और चिकित्सा के
क्षेत्र में अनंत संभवनाएं हैं ।
उत्तराखण्ड में अनमोल एवं दुर्लभ जड़ी-बूटियों के भण्डार हैं । यहां की जड़ी-बूटियों की पहचान हो, उनकी पैकेजिंग हो और निर्यात हो, इसके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि उत्तराखण्ड को ‘हरबल स्टेट’ घोषित किया जाए ।
विपुल प्राकृतिक सम्पदा के अलावा, यहां 485 एकड़ जमीन को चिकित्सा जड़ी-बूटी क्षेत्र बनाया गया है जिसके लिए केन्द्र सरकार ने रू. 386 लाख रूपये की सहायता राशि दी है । इसके अलावा 330 लाख रूपये भारत सरकार द्वारा चिकित्सा जन्य जड़ी-बूटियों के संरक्षण और विकास के लिए दिये गये हैं । भारत सरकार उत्तराखण्ड राज्य में आयुष स्वास्थ्य पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और अन्य प्राकृतिक चिकित्साओं के प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन के लिए प्रतिबद्ध है । राष्ट्रीय आयुष मिशन की स्थापना इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए की गयी है । राष्ट्रीय आयुष मिशन का लक्ष्य है कि आयुष सेवाएं, आयुष अस्पताल और आयुष दवाएं लोगों को सुलभ हो, और उनका लाभ अधिकतम लोगों को मिले ।
आयुष चिकित्सा निवारक होने के साथ-साथ, स्वास्थ्य प्रोत्साहन और आरोग्य जीवन के लिए नि:संदेह श्रेयस्कर है । आयुष चिकित्सा शिक्षा के लिए भी उत्तराखण्ड उपयुक्त है और इस क्षेत्र में निवेशक की बहुत संभावनाएं हैं । भारत सरकार ने हल्द्वानी में एक 50 विस्तर के आयुष अस्पताल और हरिद्वार में एक यूनानी कॉलेज खेलने की स्वीकृति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दी है । इसके लिए प्रथम सहायता किस्त निर्गत हो चुकी है और शेष राशि भी निर्गत होगी जैसे ही राज्य सरकार इसकी मांग रखेगी ।
उत्तराखण्ड में अनमोल एवं दुर्लभ जड़ी-बूटियों के भण्डार हैं । यहां की जड़ी-बूटियों की पहचान हो, उनकी पैकेजिंग हो और निर्यात हो, इसके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि उत्तराखण्ड को ‘हरबल स्टेट’ घोषित किया जाए ।
विपुल प्राकृतिक सम्पदा के अलावा, यहां 485 एकड़ जमीन को चिकित्सा जड़ी-बूटी क्षेत्र बनाया गया है जिसके लिए केन्द्र सरकार ने रू. 386 लाख रूपये की सहायता राशि दी है । इसके अलावा 330 लाख रूपये भारत सरकार द्वारा चिकित्सा जन्य जड़ी-बूटियों के संरक्षण और विकास के लिए दिये गये हैं । भारत सरकार उत्तराखण्ड राज्य में आयुष स्वास्थ्य पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और अन्य प्राकृतिक चिकित्साओं के प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन के लिए प्रतिबद्ध है । राष्ट्रीय आयुष मिशन की स्थापना इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए की गयी है । राष्ट्रीय आयुष मिशन का लक्ष्य है कि आयुष सेवाएं, आयुष अस्पताल और आयुष दवाएं लोगों को सुलभ हो, और उनका लाभ अधिकतम लोगों को मिले ।
आयुष चिकित्सा निवारक होने के साथ-साथ, स्वास्थ्य प्रोत्साहन और आरोग्य जीवन के लिए नि:संदेह श्रेयस्कर है । आयुष चिकित्सा शिक्षा के लिए भी उत्तराखण्ड उपयुक्त है और इस क्षेत्र में निवेशक की बहुत संभावनाएं हैं । भारत सरकार ने हल्द्वानी में एक 50 विस्तर के आयुष अस्पताल और हरिद्वार में एक यूनानी कॉलेज खेलने की स्वीकृति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दी है । इसके लिए प्रथम सहायता किस्त निर्गत हो चुकी है और शेष राशि भी निर्गत होगी जैसे ही राज्य सरकार इसकी मांग रखेगी ।
श्री
चौबे ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का प्रमुख उद्देश्य
स्वास्थ्य प्रणाली के सभी आयामों- स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश,
स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं के व्यवस्थापन और वित्त पोषण, रोगों की
रोकथाम, प्रौद्योगिकी तक पहुंच, मानव संसाधन विकास, विभिन्न चिकित्सा
प्रणालियों को प्रोत्साहन तथा उनमें आपसी सहयोग अपेक्षित चिकित्सा ज्ञान
का आधार तैयार करना है ।
यह भी उद्देश्य है कि चिकित्सा सेवाओं में व्यावसायिकता के साथ-साथ सत्यनिष्ठा और नैतिकता हो । हमारी स्वास्थ्य नीति स्वच्छता, संतुलित और गुणकारी आहार, नियमित व्यायाम, नशामुक्ति तथा प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष बल देती है । आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना स्वास्थ्य नीति के कार्यान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है । देश भर में डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्र, नैदानिक और जरूरी दवाओं और चिकित्सकों से पूर्ण, वर्ष 2022 स्थापित होंगे । इसी वर्ष 15 हजार से भी ज्यादा ये केन्द्र शुरू हो जायेंगे ।
उत्तराखण्ड में 40 स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्र शुरू हो चुके हैं और वर्ष के अंत तक इनकी संख्या 376 हो जायेगी । इस वित्तीय वर्ष में भारत सरकार ने उत्तराखण्ड को 1659.20 लाख रूपये स्वीकृत किये हैं ।
यह भी उद्देश्य है कि चिकित्सा सेवाओं में व्यावसायिकता के साथ-साथ सत्यनिष्ठा और नैतिकता हो । हमारी स्वास्थ्य नीति स्वच्छता, संतुलित और गुणकारी आहार, नियमित व्यायाम, नशामुक्ति तथा प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष बल देती है । आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना स्वास्थ्य नीति के कार्यान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है । देश भर में डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्र, नैदानिक और जरूरी दवाओं और चिकित्सकों से पूर्ण, वर्ष 2022 स्थापित होंगे । इसी वर्ष 15 हजार से भी ज्यादा ये केन्द्र शुरू हो जायेंगे ।
उत्तराखण्ड में 40 स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्र शुरू हो चुके हैं और वर्ष के अंत तक इनकी संख्या 376 हो जायेगी । इस वित्तीय वर्ष में भारत सरकार ने उत्तराखण्ड को 1659.20 लाख रूपये स्वीकृत किये हैं ।
आयुष्मान
भारत का दूसरा फलक है, देश के दस लाख से भी ज्यादा गरीब और कमजोर वर्ग के
परिवारों को 5 लाख तक की प्रति परिवार, प्रतिवर्ष नि:शुल्क चिकित्सा
अस्पतालों में उपलब्ध करवाना । इससे 50 करोड़ से भी ज्यादा और 40
प्रतिशत देश की जनसंख्या लाभान्वित होगी । सरकार ने सर्वेक्षण से पाया कि
देश की 4.6 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य चिकित्सा के अवहनीय खर्चे के कारण
गरीबी के कुचक्र में हर साल फंस जाती है । यह भी सर्वे से स्पष्ट हुआ कि
62.58 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य का खर्चा खुद उठाते हैं, कोई स्वास्थ्य
बीमा न होने के कारण । भारत सरकार ने हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री श्री
नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य
योजना का निर्णय लिया ताकि भारत आरोग्य और समृद्ध हो ।
देश
के 29 राज्य और सभी केन्द्र शासित राज्य इस स्कीम में सम्मिलित हो
चुके हैं । दस हजार से भी ज्यादा अस्पतालों ने इमपैनल होने के लिए आवेदन
दिये हैं । भारत सरकार यह भी विचार कर रही है कि आयुष अस्पतालों को किस
प्रकार से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में सम्मिलित किया
जाए ।
श्री
चौबे ने आशा व्यक्त की कि उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के सर्वांगीण और
सतत विकास के लिए जो नीतियां अभी निर्मित की हैं उससे उत्तराखण्ड में
निश्चित रूप से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नये अवसरों का सृजन होगा,
उत्तराखण्ड का समावेशी और सतत विकास होगा तथा उत्तराखण्ड की
आध्यात्मिक धरोहर और पर्यावरण अक्षुण्ण रहेगा ।
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