ऋषिकेश :
उत्तम सिंह
नि: शुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल मायाकुंड में शुक्रवार को शहीदे आजम सरदार भगत सिंह की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस मौके पर स्कूल के निदेशक डॉ राजे नेगी ने स्कूली बच्चों को अमर शहीद भगत सिंह के जीवन के बारे में जानकारी देते हुवे बताया की वीर अमर शहीद भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी थे वो अक्सर कहा करते थे कि जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं' देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए वह महज तेइस वर्ष की उम्र में ही फांसी के फंदे पर झूल गए थे। 28 सितंबर 1907 को जिला लायलपुर (अब पाकिस्तान में) के गांव बावली में जन्मे शहीदे आजम भगत सिंह की आज 111वीं जयंती है। अपने क्रांतिकारी विचारों और कदमों से अंग्रेजी हकूमत की जड़े हिला देने वाले भगत सिंह कहते थे, 'बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।' जैसे ही 1922 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन खत्म करने की घोषणा की तो भगत सिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोहभंग हो गया था।महज 23 वर्ष की उम्र में लाहौर षडयंत्र के आरोप में उन्हें सेंट्रल जेल में 23 मार्च, 1931 सुबह ब्रिटिश सरकार ने फांसी पर लटका दिया। भगत सिंह को अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए जाना जाता था। उनका कहना था कि, 'व्यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं।' लेकिन अपने इतने कम जीवन में उन्होंने लोगों के मन में ऐसे क्रांतिकारी विचार पैदा कर दिए थे कि जिसके बाद अंग्रेज़ो को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था। इस अवसर पर स्कूल के संरक्षक समाजसेवी कमल सिंह राणा,मीनाक्षी राणा,प्रियंका कुकरेती,प्रिया क्षेत्री,दीपिका पंत,आशुतोष कुड़ीयाल,रमेश लिंगवाल,रवि कुकरेती,उत्तम असवाल मौजूद रहे ।
.png)
एक टिप्पणी भेजें