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रुद्रप्रयाग;

भूपेंद्र भण्डारी

संसाधनों के अभाव में प्रदेश के पांच राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों पर बंदी की तलवार लटकी हुई है। इन विद्यालयों के छात्रों को देहरादून शिफट करने का प्रस्ताव है। इनमें से एक है रुद्रप्रयाग के मालतोली स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय। यहां समाज कल्याण विभाग के छात्रावास पर विद्यालय संचालित हो रहा है।
विद्यालय केे नाम पर चयनित भूमि पर धनाभाव के चलते अभी निर्माण कार्य भी शुरु नहीं हो पाया है। एक तरफ तो संसाधनों के अभाव में छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है वहीं विद्यालय के छात्रों ने स्कूल प्रबन्धन पर बडे आरोप लगाये हैं कि उन्हें काक्रोच व कीडों से सना खाना खिलाया जा रहा है।

गरीब व मेधावी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के मकसद से खोले गये राजीव गांधी नवोदय विद्यालय सरकार की बेरुखी के चलते बंदी की कगार पर आ खडे हो गये हैं।

चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चम्पावत व बागेश्वर के विद्यालयों के छात्रों को देहरादून शिफट करने का शिक्षा विभाग का प्रस्ताव शिक्षा मंत्री के पास पहुंच गया है।

जिससे इन जिलों में भी राजनैतिक हलचलें तेज हो गयी हैं। मालतोली स्थित विद्यालय में 69 बच्चे अध्यनरत हैं जिनमें से 34 बालिकाएं व 35 बालक हैं। नियमों के अनुसार तो यहां पर 21 अध्यापक होने चाहिए थे ।मगर तैनात हैं मात्र 7 अध्यापक, उनमें भी स्थाई अध्यापक महज दो हैं। कार्मस, आर्ट व विज्ञान की यहां तीन फैकेल्टियां स्वीकृत हैं जब्कि शिक्षकों के अभाव में महज विज्ञान विषय ही संचालित हो रहा है। विद्यालय के लिए तिलवाडा के सुमाडी में भूमि चयनित है मगर अभी तक भवन निर्माण का कार्य भी अधर में है। 

वहीं सरकार के इस प्रस्ताव पर कांगे्रस खुलकर सामने आ गयी है। कांगे्रस का कहना है विद्यालय खोलने का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का था मगर सरकार इन विद्यालयों में संसाधन न जुटाकर इन्हें बन्द करने जा रही है इससे सरकार की शिक्षा के प्रति घोर लापरवाही साफ दिख रही है। और कांगे्रस इस प्रस्ताव के विरोध में खुलकर सडकों पर उतरेगी।

वहीं विद्यालय के बच्चों का साफ कहना है कि जब इन विद्यालयों को बन्द ही किया जाना था तो खोला ही क्यूं था। और अब अगर शिफट होते हैं तो कम से कम हमारा भविष्य तो बन पायेगा। अन्यथा ऐसे ही संसाधनों के अभाव में पडना पडेगा और काक्रोच व कीडों से भरा खाना खाने के लिए मजबूर होना पडेगा।
वहीं बच्चों की समस्याओं को लेकर जब विद्यालय के प्रार्चाय व किचन स्टाफ को पूछा गया तो वे बगलें झांकने लगे और बरसात के दौरान ऐसा होने की बात कहने लगे।
संसाधनों के अभाव में बच्चों को शिफ्ट किया जाता है तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव तो बच्चों पर पडेगा मगर इस ब्यवस्था से अविभावक भी परेशान होंगे साथ ही यहां पर संविदा स्टाफ के रुप में अपनी सेवाएं दे रहे है, उन
कर्मचारियों के सामने भी रोजगार के संकट पैदा होंगे। और फिर पलायन रोकने के लिए गठित पलायन आयोग की कार्ययोजनाओं पर फिर से सवाल उठेंगे, कि क्या यही हैं आयोग की सिफारिशों ।

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