जनजातीय मामलों के मंत्रालय के स्वायत्त संगठन ट्राइफेड द्वारा
पर्यावरण अनुकूल राखियों की बिक्री की जा रही है। ये राखियां ट्राइफेड की
खुदरा दुकानों ट्राइब्स इंडिया की सभी शाखाओं तथा मंत्रालय के वेब पोर्टल Tribesindia.com के
अलावा अमेजॉन, स्नैपडील, पे-टीएम तथा फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स पोर्टलों
पर भी उपलब्ध हैं। राखियों के अलावा इन ई-कॉमर्स पोर्टलों पर रक्षा बंधन के
अवसर पर विशेष पारम्परिक परिधानों की बिक्री भी की जा रही है।
ट्राइफेड की राखी के त्योहार के लिए इस बार की थीम है “ चलिए इस बार हम पर्यावरण अनुकूल और उगाई जा सकने वाली राखियां बांधकर पर्यावरण के प्रति अपनी जवाबदेही और लगाव को व्यक्त करें।“
ट्राइफेड
की ओर से पेश किए गए ये सभी उत्पाद कपड़े और सीड पेपर से बनाए गए हैं। इन
सीड पेपरों को मध्य प्रदेश के ओरछा की साहरिया आदिवासी महिलाओं ने बनाया
है। इनमें तुलसी और गेंदे के बीजों का प्रयोग किया गया है। इसलिए इन्हें
उगाया जा सकता है।
ट्राइफेड
ने इन राखियों के जरिए लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रभावी तरीके
से पहुंचाने की कोशिश की है। साहरिया आदिवासी समुदाय के अलावा राखियां
बनाने के काम में हिमाचल प्रदेश की जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं को भी
जोड़ा गया है।
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