ऋषिकेश :
उत्तम सिंह
राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजर रही रेल लाइन बेहद संवेदनशील है। अक्सर ट्रैक पर हाथी आ जाते हैं। मंगलवार सुबह कांसरो के समीप रेल ट्रैक पर हाथियों का झुंड आ गया जिसमें 25 हाथी शामिल थे।
सुबह करीब साढ़े 6 बजे रेल ट्रैक पर हाथियों के झुंड आ गया। इसका पता लगते ही ट्रैक पर तैनात सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंच गए। हालांकि उस वक्त कोई ट्रेन आसपास नहीं थी लेकिन सुरक्षा कर्मी अलर्ट हो गए और इसकी सूचना प्रसारित की। वहीं हाथी भी समझदार प्राणी कहा जाता है। एक-एक हाथी इधर-उधर देख कर एक-एक कर आराम से ट्रैक पार कर गए। मादा हाथी अपने शिशु हाथियों को ट्रैक पार कराते देखी गयी। इसके बाद हाथी करीब 30 मिनट तक पास की झाड़ियों में खड़े रहे। कांसरो के रेंज अधिकारी दिनेश प्रसाद उनियाल ने बताया कि झुंड में करीब 20 से 25 हाथी थे जिनमें शिशु हाथी भी थे। ट्रैक पर चार-चार सुरक्षा कर्मियों की टीम तैनात है जो हर वक्त ट्रैक की मॉनिटरिंग करती है। बता दें कि वन क्षेत्र से गुजर रहे हरिद्वार-देहरादून रेल ट्रैक पर 34 साल के अंतराल में 29 हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने की वजह से हुई है। हाल ही में 17 फरवरी 2018 और फिर 20 मार्च को कांसरो के पास ट्रेन से टकरा कर दो मादा हाथियों की मौत हुई।
सुबह करीब साढ़े 6 बजे रेल ट्रैक पर हाथियों के झुंड आ गया। इसका पता लगते ही ट्रैक पर तैनात सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंच गए। हालांकि उस वक्त कोई ट्रेन आसपास नहीं थी लेकिन सुरक्षा कर्मी अलर्ट हो गए और इसकी सूचना प्रसारित की। वहीं हाथी भी समझदार प्राणी कहा जाता है। एक-एक हाथी इधर-उधर देख कर एक-एक कर आराम से ट्रैक पार कर गए। मादा हाथी अपने शिशु हाथियों को ट्रैक पार कराते देखी गयी। इसके बाद हाथी करीब 30 मिनट तक पास की झाड़ियों में खड़े रहे। कांसरो के रेंज अधिकारी दिनेश प्रसाद उनियाल ने बताया कि झुंड में करीब 20 से 25 हाथी थे जिनमें शिशु हाथी भी थे। ट्रैक पर चार-चार सुरक्षा कर्मियों की टीम तैनात है जो हर वक्त ट्रैक की मॉनिटरिंग करती है। बता दें कि वन क्षेत्र से गुजर रहे हरिद्वार-देहरादून रेल ट्रैक पर 34 साल के अंतराल में 29 हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने की वजह से हुई है। हाल ही में 17 फरवरी 2018 और फिर 20 मार्च को कांसरो के पास ट्रेन से टकरा कर दो मादा हाथियों की मौत हुई।
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