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ऋषिकेश, 10 अप्रैल :


 राष्ट्र को सशक्त भारत बनाने के लिए देश के बालकों को शिक्षित और संस्कारित करने के लिए भारत लोक शिक्षा परिषद और परमार्थ निकेतन आश्रम के संयुक्त तत्वाधान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन परमार्थ गंगा तट पर 15 अप्रैल तक किया जा रहा है । भारी बरसात के बावजूद आज कलश यात्रा वानप्रस्थ आश्रम से शुरू होकर परमार्थ प्रांगण से होती हुई गंगा तट कथास्थल पहुंची । देश के सुदूर क्षेत्रों से पधारे वनवासी, गिरवासी, आदिवासी माता बहनों ने मंगल कलश सर पर रखकर जल संरक्षण का संकल्प लिया । स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि इससे निश्चित रूप से हमारी भावी पीढ़ी पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए संकल्पित होगी ।

वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती  महाराज के सानिध्य में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री हंसदेवाचार्य जी महाराज, केवल्य पीठाधीश्वर आचार्य श्री अविचल दास जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्री ईश्वर दास जी महाराज और भारत लोक शिक्षा परिषद के समर्पित गणमान्य व्यकतित्वों की उपस्थिति में कथा का शुभारंभ किया गया । श्री मदभागवत कथा के इस पावन अवसर पर एकल अभियान के प्रणेता श्री श्याम  गुप्त श्री सजन बंसल , भारत लोक शिक्षा परिषद के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष श्री लक्ष्मी गोयल , श्री नरेश कुमार , श्री जी डी गोयल , श्री ओमप्रकाश सिंघल , श्री आखिल गुप्ता , श्री नीरज रायजादा  आदि उपस्थिति थे ।

श्रीमद भागवत कथा के मुख्य यजमान श्रीमती कनक नंदकिशोर अग्रवाल  ने व्यास पूजन कर कथा व्यास श्री गोविंद देव गिरी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया । माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर एकल विद्यालय को पूरे देश के एक लाख गांवों तक पहुंचाने के लिए आयोजित श्रीमदभागवत कथा द्वारा एकल सांस्कृतिक महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया । इस अवसर पर वरिष्ठ संत महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद जी महाराज ने कहा कि राष्ट्र के लिए शिक्षा संस्कार का दान देकर हम भारत के रहने वालों को राष्ट्र से भरना होगा और  बनवासी, आदिवासी को जोडना  होगा । केवल्य पीठाधीश्वर आचार्य श्री अविचल दास जी महाराज ने कहा कि बिना किसी भेदभाव के हमें अपने लोगों को एकत्व का भावना भरना होगा, ऊंच-नीच, जात-पांत को छोड़कर शिक्षा को हरजन तक पहुंचाना होगा, उनमें राष्ट्र भावना भरना होगा । जगद्गुरु स्वामी श्री हंसदेवाचार्य जी ने कहा कि सबसे पहले हमारे लिए राष्ट्र है उसके बाद कुछ और । हर बालक को शिक्षा का दान देकर हम उनका और राष्ट्र का भविष्य बना सकते हैं और एकल को शिक्षा के लिए दिया सबसे बडा दान है । एकल को दान देकर हम निश्चित रूप से राष्ट्र जागरण का सबसे बड़ा कार्य कर सकते हैं । इस अवसर पर एक लाख एकल विद्यालयों की श्रृंखला को पूरा करने का उन्होंने आह्वान किया और संतो की ओर से, अपनी ओर से आजीवन विद्यालय दान देने की घोषणा भी की ।

15 अप्रैल तक चलने वाली एकल सांस्कृतिक महोत्सव में एकल श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन प्रातः 9:30 से 1:00 बजे तक, दोपहर 2:00 बजे से विभिन्न गोष्ठियां और सांय 7 बजे से 9:00 बजे तक राष्ट्रभक्ति परक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है ।

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