Halloween party ideas 2015

 

पीढ़ियों से, वक्फ सामाजिक एवं आर्थिक सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका के वित्तपोषण का स्तंभ रहा है। 


फिर भी, इसके लाभ अक्सर महिलाओं की उपेक्षा करते आए हैं, जिसके कारण उन्हें संसाधनों और निर्णय लेने तक सीमित पहुंच मिल सकी है। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025, इसे बदलने का प्रयास करता है। 


यह विधेयक निष्पक्षता और समावेशन पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुस्लिम महिलाओं को विरासत में उनके उचित हिस्से को सुरक्षित करने, वित्तीय सहायता प्रदान करने और प्रशासन में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए सुधारों की पेशकश करता है।

 

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक पारिवारिक वक्फ (वक्फ-अलल-औलाद) के अंतर्गत महिलाओं के विरासत के अधिकारों की सुरक्षा है।

 विधेयक में अधिदेशित किया  गया है कि वक्फ को संपत्ति तभी समर्पित की जा सकती है, जब यह सुनिश्चित हो जाए कि महिला उत्तराधिकारियों को उनके उचित उत्तराधिकार का हिस्सा मिल चुका है। 


यह प्रावधान उत्तराधिकार कानूनों की अनदेखी से संबंधित लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को सीधे तौर पर हल करता है, जिनसे अक्सर महिलाओं को नुकसान होता है । 


धारा 3ए(2) को लागू करके, विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों के निर्माण से पहले महिलाओं को उनके उचित दावों से वंचित न रखा जाए।

 

यह विधेयक विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए वित्तीय सहायता को शामिल करने के लिए वक्फ-अलल-औलाद के दायरे का विस्तार करता है। 

धारा 3(आर)(iv) में प्रावधान है कि वक्फ आय का उपयोग अब इन कमजोर समूहों के रखरखाव और कल्याण के लिए किया जा सकता है, जिससे इन जरूरतमंदों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।


 यह प्रावधान महिलाओं के साथ न्‍याय (यानी जेंडर जस्टिस)  के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए इस्लामी कल्याण सिद्धांतों के अनुरूप है।

 

विधेयक में एक और उल्लेखनीय सुधार वक्फ प्रशासन में महिलाओं का संवर्धित प्रतिनिधित्व है। संशोधन में राज्य वक्फ बोर्ड (धारा 14) और केंद्रीय वक्फ परिषद (धारा 9) में दो मुस्लिम महिला सदस्यों को शामिल किए जाने का  प्रावधान बरकरार रखा गया है।


 यह कदम महिलाओं को वक्फ संसाधनों के वितरण और प्रबंधन को प्रभावित करने वाली निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अपनी बात रखने की अनुमति देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए निरुपित किया गया है।

प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी से नीतिगत कार्यान्वयन में मौलिक बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि धन का आवंटन निम्‍नलिखित प्रमुख क्षेत्रों के लिए हो:

• मुस्लिम लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति

• स्वास्थ्य सेवा और मातृत्व कल्याण

• महिला उद्यमियों के लिए कौशल विकास और माइक्रोफाइनेंस सहायता

• उत्तराधिकार विवादों और घरेलू हिंसा के मामलों के लिए कानूनी सहायता

 

विधेयक में प्रस्‍तुत किए गए सुधारों का उद्देश्य वक्फ प्रणाली में मौजूद ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करके महिलाओं के साथ न्‍याय (यानी जेंडर जस्टिस)  को बढ़ावा देना है। निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में महिलाओं को शामिल करने और कमजोर समूहों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के माध्यम से यह विधेयक वक्फ शासन के लिए अधिक समावेशी और न्यायसंगत दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

 

इसके अतिरिक्त, यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं में आर्थिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की स्थापना को सुगम बनाता है। इन पहलों से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और फैशन डिजाइन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कौशल हासिल करने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

 

नया विधेयक वक्फ प्रबंधन में डिजिटलीकरण की शुरुआत करता है, जो भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


 वक्फ रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण बेहतर निगरानी सुनिश्चित करता है, जिससे धन का दुरुपयोग होना या उसका इच्छित लाभार्थियों के स्‍थान पर अन्‍य को भेजा जाना मुश्किल हो जाता है।


 यह बढ़ी हुई पारदर्शिता महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इस बात की गारंटी देती है कि निर्धारित वित्तीय संसाधन उनके उत्थान के लिए हैं और उनका उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाता है।

 

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि वक्फ समाज कल्याण और न्याय के साधन के रूप में सेवा प्रदान करने के अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा करे।  उत्तराधिकार के अधिकार को सुरक्षित करके, विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करके, शासन में प्रतिनिधित्व बढ़ाकर और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देकर, यह विधेयक वक्फ प्रशासन में दीर्घकालिक महिला पुरुष समानता की नींव रखता है। जैसे-जैसे ये सुधार आकार लेंगे, वे मुस्लिम महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने का वादा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वक्फ आने वाले वर्षों में उनकी प्रगति और सशक्तिकरण का माध्यम बना रहे।


धर्म से परे: वक्फ को संपत्ति प्रबंधन के रूप में समझना

भारत में वक्फ की कानूनी और प्रशासनिक वास्तविकताओं को सुलझाना

भारत में वक्फ प्रणाली को लंबे समय से धार्मिक चश्मे से देखा जाता रहा है। हालांकि, कानूनी प्रावधानों, न्यायिक व्याख्याओं और नीतिगत विकास की एक नजदीकी जाँच यह स्पष्ट करती है कि वक्फ मुख्य रूप से धार्मिक अभ्यास के बजाय संपत्ति प्रबंधन, प्रशासन और शासन का मामला  है। वक्फ अधिनियम, 1995 बाद के संशोधनों के साथ, वक्फ संपत्तियों के विनियमन, उनके उचित प्रशासन और उपयोग को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। वक्फ अधिनियम, 1995, वक्फ को इस्लामी कानून द्वारा    पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ  के रूप में मान्यता प्राप्त उद्देश्यों के लिए मुस्लिम व्यक्ति द्वारा  चल या अचल संपत्ति के स्थायी समर्पण के रूप में परिभाषित करता  है। हालांकि, वक्फ का प्रमुख पहलू इसके धार्मिक अर्थों में नहीं बल्कि इसके संपत्ति-केंद्रित प्रशासन में निहित है

 

CS Anand Vardhan  meeting regarding rail faciality

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने परिवहन विभाग को राज्य में प्रस्तावित सभी रेल परियोजनाओं की स्थिति पर अपडेट देने एवं वर्तमान में संचालित रेल परियोजनाओं में आ रही बाधाओं व समस्याओं पर बिन्दुवार रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने देहरादून सहित सभी रेलवे स्टेशनों के अपग्रेडेशन की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा है।  इसके साथ ही सीएस ने राज्य में प्रस्तावित एवं संचालित रेल प्रोजेक्ट्स से सम्बन्धित मुद्दों पर रेल मंत्रालय, आरवीएनएल सहित सम्बन्धित संस्थाओं से प्रभावी समन्वय के निर्देश दिए हैं। 


 मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का रेल नेटवर्क से संयोजन, राज्य के औद्योगिक आर्थिक एवं सामाजिक विकास, विश्व प्रसिद्ध धामों, तीर्थ में वर्ष भर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन  तथा सामरिक महत्व के दृष्टिगत  रेलवे का अवसंरचना का राज्य हेतु अत्यंत महत्व है |



परिवहन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि राज्य में कुल पांच रेल परियोजनाएं हैं जिनमें तीन प्रस्तावित एवं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग सहित दो परियोजनाएं वर्तमान में संचालित की जा रही है। गंगोत्री यमुनोत्री रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 121.76 किमी है तथा 10 स्टेशन हैं। इसका सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है तथा डीपीआर रेलवे बोर्ड को उपलब्ध करा दी गई है। इस पर अनुमोदन प्रतीक्षित है। टनकपुर बागेश्वर रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 170.70 किमी है तथा 12 स्टेशन हैं। इसका सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है तथा डीपीआर रेलवे बोर्ड को उपलब्ध करा दी गई है। इस पर अनुमोदन प्रतीक्षित है। देहरादून -सहारनपुर रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 92.60 किमी0 है तथा इसमें 8 स्टेशन है। इसका सर्वेक्षण कार्य गतिमान है।   

बैठक में सचिव परिवहन, अपर सचिव परिवहन, सचिव एमडीडीए सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

 जन भावनाओं के अनुरूप नाम परिवर्तन करने पर 

विकास के साथ विरासत का संरक्षण हमारी प्राथमिकता : सीएम

Haridwar people meet to CM Dhamo


प्रदेश के विभिन्न स्थानों का जन भावना के अनुरूप नाम परिवर्तन करने पर विधायक प्रदीप बत्रा तथा पूर्व विधायक यतीश्वरानंद  के नेतृत्व में हरिद्वार के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनमानस ने मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन में  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। 


इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संभ्रांत नागरिकों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने गुलामी की मानसिकता के प्रतीक में बदलाव भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप  किया है। 


 लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विगत तीन वर्षों में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।


मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि विभिन्न स्थानों का नामकरण भारतीय संस्कृति की पहचान के अनूरूप जनभावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।  हमारे पूर्वजों द्वारा जो विरासत हमें प्राप्त हुई है हम उसी को आगे बढ़ाने  का काम कर रहे हैं।


 उन्होंने कहा कि हर वह निर्णय जो हमारे प्रदेश, जनता और भारतीय संस्कृति के हित में होगा उसको लेने से हम कभी भी पीछे नहीं हटेंगे।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश और प्रदेश बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।  प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जिस प्रकार से भारत का नाम विश्व पटल पर गुंजायमान हो रहा है उसी तरह से  प्रधानमंत्री की प्रेरणा से  उत्तराखंड में हमारी सरकार ने विगत 3 वर्षों से ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण का बने हैं। 


 इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हरिद्वार किरण चौधरी, पूर्व विधायक देशराज कर्णवाल व प्रणव कुंवर चैंपियन सहित हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में यंग उत्तराखंड के सदस्यों ने भेंट की।


Song Gulabi shararat team meet to CM


मुख्यमंत्री ने  "गुलाबी शरारा" गीत की सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी और उन्हें प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकारों ने प्रतिभा और कड़ी मेहनत से हमारी लोक संस्कृति को बढ़ाने का कार्य किया है। "गुलाबी शरारा" गीत के 300 मिलियन से अधिक व्यूज ने यह सिद्ध कर दिया है कि राज्य के युवा प्रतिभा  सम्पन्न है। अपने गीत और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


इस अवसर पर यंग उत्तराखंड से श्री जितेन्द्र सिंह रावत, गिरीश सिंह जीना, वरुण रावत, राकेश जोशी, नीरू बोरा, अंकित कुमार, अशीम मंगोली, रणजीत सिंह भंडारी और सौरभ सेमवाल मौजूद थे।

 देहरादून;



 प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात की।


खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि संसद परिसर में हुई मुलाकात में समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई। इस शिष्टाचार भेंट में उत्तराखंड में सरकार द्वारा चलाई जा रही कई जनहित की योजनाओं पर मंत्री रेखा आर्य ने केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी।


इसके अलावा संसद परिसर में लोकसभा महासचिव और पूर्व में उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे उत्पल कुमार सिंह से भेंट कर मंत्री रेखा आर्य ने उनका कुशल क्षेम जाना। इस दौरान उत्पल कुमार ने संविधान की मूल प्रति व उसका कैलेंडर मंत्री को भेंट कियाI


 

एआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टिः एसएमओ का हो गया निलम्बन

मिक्स इंडिकेटर मैथर्ड से परीक्षण में क्विंटल के क्विंटल अनाज हुए थे फेल

बच्चों, नौनिहालों, बजुर्गों व धात्री महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ पर डीएम बेहद नाराज, 


देहरादून :

DM dehradun visit to Miller's godown


 जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा प्रशासन की टीम के साथ गुलर घाटी अन्न भण्डारण में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान अनिमितता पाए तथा मिक्स इंडिकेटर मैथर्ड से परीक्षण के दौरान क्विंटलों अनाज के सैम्पल फेल होने पर रखरखाव व्यवस्था, स्टॉक रजिस्टर मैंटेन न होने आदि कई कमियां पाई गई थी, जिस पर डीएम ने एसएमओ को निलंबित करने तथा लापरवाही पर एआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश दिए थे। विगत सप्ताह लगातार 05 घंटे जिला प्रशासन की टीम ने गोदाम में जांच किए रिकार्ड, अनाज की सैम्पलिंग कराई। 

मुख्य विकास अधिकारी को जांच अधिकारी नामित करते हुए सम्बन्धित कार्मिकों के विरूद्ध उत्तरांचल सरकारी सेवक नियमावली-2003 के अन्तर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है। 

एसएमओ विष्णु प्रसाद त्रिवेदी निलम्बित, एआरओ अजय रावत को प्रतिकूल प्रविष्टि।  निलम्बित कार्मिक मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से सम्बद्ध रहेंगे। विष्णु प्रसाद त्रिवेदी, गोदाम प्रभारी/वरिष्ठ विपणन अधिकारी की इन अनियमितताओं के लिए मुख्य भूमिका रही है, जो भण्डारण, खरीद गुणवत्ता नियंत्रण एवं प्राप्ति हेतु उत्तरदायी मानते हुए उन पर निलम्बन की कार्यवाही की गई है। इसी प्रकार एआरओ अजय रावत की भूमिका लापरवाह एवं संदिग्ध प्रतीत हुई है जो जिले के आन्तरिक गोदामों व सरारी सस्ता गल्ला दुकानों की प्राप्ति हेतु उत्तरदायी हैं एवं बगैर गुणवत्ता सुनिश्चित किए ही अनाज को जिले के निर्बल वर्ग, धात्री महिलाओं, नौनिहालो व बुजुर्गों के सेवन हेतु प्राप्त कर वितरित किया जा रहा है।  

नकरौंदा स्थित इस अन्न भण्डार से सम्पूर्ण गढ़वाल क्षेत्र के साथ जनपद के आन्तरिक गोदामों, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों, आंगनवाड़ी केन्द्रों में आने वाले नौनिहालों, धात्री माताओं व राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत् छात्र-छात्राओं को मिड-डे मील उपभोग के लिए आपूर्ति की जाती है। जनमानस सा जुड़ा विषय होने के कारण डीएम ने सख्त प्रर्वतन कार्यवाही का मन बना लिया है। निरीक्षण के दौरान अन्न भण्डार प्रबन्धन एवं संचालन में सम्बन्धित नियमों व दिशा-निर्देशों के उल्लंघन व  गहन अनियमितताएं परिलक्षित हुई थी।

मौके पर अनाज का भण्डारण अनुचित पाया गया

रैक जो अनाज को नमी, रैट टेªप जो चूहों, कीट से सुरक्षित करते हैं नहीं पाये गये। अनाज के बोरों का वजन नियमानुसार कट्टा सहित 50.5 किलोग्राम होता है, परन्तु 50.5 किलोग्राम वजन के सापेक्ष गेहू के बोरे का औसतन वजन 43 किलोग्राम, व चावल के बोरों का औसतन वजन 47 किलोग्राम मौके पर होना पाया गया, जो भारी अनियमितता पाई गई। 

 इन्वेंटरी मैजनेमेंट स्टॉक रजिस्टर अनैतिक ढंग से अपूर्ण  अहस्ताक्षरित पाए गए थे


 निरीक्षण के दौरान इन्वेंटरी मैजनेमेंट स्टॉक रजिस्टर अनैतिक ढंग से अपूर्ण  अहस्ताक्षरित पाए गए थे  और अधिकतर  रजिस्टर के अंकन में अत्यधिक भिन्नता थी। अनाज के स्टैक पर स्टैक कार्डस अधिकांश जगह पर डिस्प्ले नहीं थे और जहां पर थे भी उन पर स्थान, तिथि वजन की तिथि, बोरियों की संख्या अंकित नहीं थी। स्टाक रजिस्टर अंकन एवं भौतिक सत्यापन मध्य भी अत्यधिक अन्तर पाया गया।


फिफो (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) के नियमों का उल्लंघन 

फिफो (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) जो अन्न भण्डारण प्रबन्धन का मौलिक नियम है के किसी भी नियम का पालन किया जाना नहीं पाया गया। न तो फिफो रजिस्टर मैंटेन किये गये और न ही प्रथम आवत माल की प्रथम निकासी की गयी।


गुणवत्ता परीक्षण अनाज की गुणवत्ता जांचने हेतु चावल के 61 नमुने लिए गये, जिसमें से 26 नमूने फेल पाये गये जो रद्द श्रेणी अन्तर्गत घोषित किये गये है। भारतीय खाद्य निगम द्वारा जारी एसओपी मिक्स इंडिकेटर मैथर्ड  के अनुसार रद्द श्रेणी में पाये गये हैं। उक्त समस्त अनियमितताऐं खरीफ खरीद नीति 2024-25 एवं उपभोक्ता मामले अनुभाग-2, दिनांक 30 सितम्बर, 2024 एवं भारतीय खाद्य निगम द्वारा जारी एसओपी मिक्स इंडिकेटर मैथर्ड में राजकीय अन्न भण्डारों में अनाज के सुव्यवस्थित भण्डारण एवं गुणवत्ता नियंत्रण हेतु जारी निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन।

-।

 डबल इंजन का दम - बीते एक साल में बनी 814 किमी लंबी ग्रामीण सड़कें

814 km rural roads constructed in 2024-2025


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत हाल में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान 814 किमी लंबी सड़कों का निर्माण किया गया। राज्य की प्रगति को देखते हुए भारत सरकार ने योजना के तीसरे चरण में स्वीकृत 09 पुलों के निर्माण के लिए भी बजट जारी कर दिया है। 

उत्तराखण्ड राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में रू0 900 करोड़ के वित्तीय लक्ष्यों के सापेक्ष लगभग रू0 933 करोड़ की धनराशि व्यय की गई है, जो विगत वर्ष 2023-24 में किये गये व्यय से रू0 133 करोड़ अधिक है। इसी प्रकार भौतिक उपलब्धि में भी वित्तीय वर्ष 2024-25 में 814 किमी लम्बाई में मार्गो का निर्माण किया गया है, जो वर्ष 2023-24 की उपलब्धि 206 किमी अधिक है। इस बीत गत वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन पीएमजीएसवाई -3 के अन्तर्गत 09 सेतुओं के निर्माण के लिए 40.77 करोड़ की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हो गई है। 

इधर, विभाग ने पीएमजीएसवाई-4 के तहत 1490 सड़क विहीन बसावटों को चिन्हित कर प्रथम चरण में लगभग 8500 किमी सड़कों निर्माण का सर्वे पूरा करते हुए, डीपीआर पर काम शुरू कर दिया है। विभाग ने कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जारी निर्देशों के अतिरिक्त एक विशेष निरीक्षण एप तैयार किया है। एप के माध्यम से फील्ड अधिकारियों द्वारा किये जाने वाले निरीक्षणों को नियमित रूप से अंकित किया जा रहा है, जिससे उच्चाधिकारियों द्वारा मार्गों की गुणवत्ता का अनुश्रवण करना सुलभ हो गया है। भारत सरकार स्तर पर भी इस पहल की सराहना करते हुए अन्य राज्यों को इसे अपनाने को कहा है। विदित है कि सड़क विहीन गांवों के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना शुरु की गई थी। योजना के प्रथम तीन चरणों में न्यूनतम 500 की आबादी वाले गांवों को सड़कों से जोड़ने का काम करीब- करीब पूरा हो चुका है। 


*डबल इंजन की सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जरिए राज्य की छोटी - छोटी बसावटों को सड़क से जोड़ने का काम किया जा रहा है। हाल के सम्पन्न वित्तीय वर्ष में विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किया है, अब हम चौथे चरण में शेष बसावटों को बारह मासी सड़क से जोड़ने का काम करेंगे।* 

  पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड


-

www.satyawani.com @ All rights reserved

www.satyawani.com @All rights reserved
Blogger द्वारा संचालित.