Halloween party ideas 2015

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवर को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री केदार सिंह स्टेडियम, नागथात, देहरादून में आयोजित जौनसार बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव एवं क्रीड़ा समारोह-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री केदार सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

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मुख्यमंत्री ने इस दौरान समरजेंस मोटर मार्ग का चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य किए जाने, प्राथमिक विद्यालय नागथात को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने, वि.ख. चकराता के बागी -खेड़ा -कोटा- तपलाड मार्ग में यमुना नदी पर 60 मी. स्पैन पुल का निर्माण कार्य किए जाने, चकराता के क्यारापुल - डामटा - म्यूँडा मोटर मार्ग के कि.मी. 22 से छामरी एवं जाखणी तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य, विकासखंड कालसी के अंतर्गत ग्राम सकरोल से ग्राम भोड़ा-भालनू एवं उटेल होते हुए द्वितीय सिद्ध पीठ श्री महासू महाराज थैना तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य , वि.ख. चकराता के अंतर्गत ग्राम खबऊ के अन्तर्गत खेड़ा रमारका- कुन्ना - बुराष्टी में यमुना नदी से पम्पिंग पेयजल योजना बनाए जाने, वि.ख चकराता के जगथान बुरायला मार्ग से ग्राम उदांवा तक सडक निर्माण को PMGSY में प्रस्तावित किए जाने एवं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए द्वीना से बिसोई खुना अलमान तक नए संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य किए जाने की घोषणा की।


मुख्यमंत्री ने श्री महासू देवता को नमन करते हुए कहा कि जौनसार बावर सांस्कृतिक पुनरूत्थान समिति पिछले 33 वर्षों से इस उत्सव के माध्यम से धरोहर को बचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा जौनसार भाबर प्राकृतिक सुंदरता के साथ अपनी मेहनतकश, सरल और स्वाभिमानी जनता के लिए जाना जाता है। यहां की लोक संस्कृति, एकता की भावना को बढ़ावा एवं भविष्य की पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा जौनसार- बावर में उन्हें उत्तराखण्ड की मूल आत्मा के साक्षात दर्शन होते हैं। जौनसार की संस्कृति, परंपराएँ, सरलता, आत्मीयता और प्रकृति के प्रति सम्मान, राज्य की समृद्ध विरासत है। 


मुख्यमंत्री ने कहा जौनसार के रासो की थाप, हारूल की गूंज और बौंद जैसी महान परंपराएं  उत्तराखंड, के साथ पूरे देश का गौरव हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनजातीय समाज के सम्मान, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देश में जनजातीय समुदायों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी अनेक योजनाएँ लागू की गईं हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी समाज की नीतियां और नियति दोनों बदली हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव के माध्यम से संस्कृति व विरासत को एक मंच देने का प्रयास किया है। सरकार ने प्रतिवर्ष जनजातीय खेल महोत्सव आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान  के अंतर्गत प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित किया है। जिसके तहत इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी हर बुनियादी सुविधा पहुंचाकर इनका कायाकल्प करने का काम किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जनजातीय बच्चों को निःशुल्क विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा की सुविधा मिल रही है। बाजपुर और चकराता में भी नए एकलव्य आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्य जारी है। जनजातीय समाज के बच्चों को पढ़ाई के लिए सरकार, प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रही है। शैक्षिक विकास के लिए वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह के लिए ₹ 50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड की स्थापित की गई है  जौनसार बावर क्षेत्र में सड़कों, पानी और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है। चकराता के विकास के लिए राज्य सरकार ने लगभग 39 करोड़ रुपये की 56 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से 51 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष 5 योजनाओ को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। पूरे क्षेत्र की सड़कों को मजबूत करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं पर काम चल रहा है। 


मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 707 और 707A का चौड़ीकरण युद्धस्तर पर जारी है। कालसी-चकराता मार्ग पर जजरेड के पास भूस्खलन की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है।  न्यू चकराता टाउनशिप हय्यो डांडा पंपिंग योजना पर लगभग 229 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। जिससे भविष्य में पानी की कभी कमी नहीं होगी। श्री महासू देवता मंदिर परिसर के भव्य विकास के लिए 120 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मास्टर प्लान पर विकास कार्य भी गतिमान है। 


इस अवसर पर विधायक श्री मुन्ना सिंह चौहान ,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मधु चौहान, दायित्वधारी श्री गीता राम गौड़, मेला समिति के अध्यक्ष श्री नरेश चौहान, महासचिव मेला समिति श्री नरेन्द्र तोमर, श्री खुशीराम जोशी, श्री जयपाल सिंह तोमर, श्री शूरवीर सिंह तोमर, श्री बलवीर सिंह नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR कार्यक्रम के तहत सचिवालय में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी. आर. सी. पुरुषोत्तम ने गणना फॉर्म सौंपा।

SIR counting form to leaders Uttarakhand


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अवगत कराया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण हेतु यह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी मतदाताओं को गणना फार्म उपलब्ध कराए जाएंगे। आगामी 7 जुलाई तक एक माह के समय में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के गणना फार्मों को बीएलओ एप्प के माध्यम से डिजिटिलाइज किया जाएगा। 



इस अवसर पर सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास मौजूद रहे।


उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार से प्रदेश के सभी मतदाताओं को गणना फार्म बांटने का कार्य प्रारम्भ हो गया है। इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट, इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के प्रदेश महासचिव राजकुमार पुरोहित, बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश सचिव श्री जसपाल सिंह को गणना फार्म वितरण किया गया।


REAP परियोजना से मिली उड़ान, ‘हिलान्स’ ब्रांड का सरसों तेल बाजार में बना भरोसेमंद नाम*


*उत्कृष्ट गुणवत्ता के दम पर बाजार में मजबूत पहचान बना रही सरसों तेल यूनिट : सोनम गुप्ता*


*14 ग्राम संगठन, 120 समूह और 764 महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई इबारत*


देहरादून;

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देहरादून जनपद के कालसी विकासखंड स्थित हरीपुर गांव में महिलाओं की मेहनत, लगन और सामूहिक नेतृत्व ने ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रेरणादायक मॉडल स्थापित किया है। विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित कोल्ड एवं हॉट प्रेस्ड सरसों तेल यूनिट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की सफल मिसाल बनकर उभरी है।


ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (ग्रामोत्थान) REAP के अंतर्गत सितंबर 2024 में स्थापित इस यूनिट ने न केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।


*10 लाख की लागत से स्थापित हुई यूनिट*

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन ने REAP परियोजना के सहयोग से 10 लाख रुपये की लागत से सरसों तेल यूनिट स्थापित की। इसमें 6 लाख रुपये परियोजना सहायता, 3 लाख रुपये बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये महिलाओं के स्वयं के अंशदान से जुटाए गए।


आज यह यूनिट ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन चुकी है। यहां लकड़ी की घानी से कोल्ड प्रेस्ड तथा मशीन के माध्यम से हॉट प्रेस्ड तकनीक से शुद्ध सरसों तेल का उत्पादन किया जा रहा है, जिसकी मांग कालसी और विकासनगर क्षेत्र के साथ-साथ देहरादून शहर तक पहुंच चुकी है।


*764 महिलाओं को मिला आर्थिक सशक्तिकरण का मंच*

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत 14 ग्राम संगठन, 120 स्वयं सहायता समूह और 764 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यूनिट के संचालन, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन गतिविधियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।


यूनिट से प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित हो रही है, जबकि स्थापना से अब तक 24 से 25 लाख रुपये मूल्य का सरसों तेल बेचा जा चुका है। इसके अतिरिक्त यूनिट में चार से पांच महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त हुआ है।


*‘हिलान्स’ ब्रांड को बाजार में मिली पहचान*

महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा सरसों तेल ‘हिलान्स’ ब्रांड के नाम से बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्पाद की गुणवत्ता और शुद्धता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।


इस सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि “हाउस ऑफ हिमालय” द्वारा यूनिट से 1700 लीटर सरसों तेल की खरीद की गई, जिससे महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। वहीं, प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की को भी यहां से सरसों तेल की नियमित आपूर्ति की जा रही है।


वर्तमान में कोल्ड प्रेस्ड तेल 300 रुपये प्रति लीटर तथा हॉट प्रेस्ड तेल 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है।


*सरसों की खल भी बढ़ा रही आमदनी*

तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली सरसों की खल भी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गई है। फेडरेशन द्वारा इसे किसानों और पशुपालकों को 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है, जिससे आय के नए अवसर सृजित हुए हैं।


*ऑनलाइन मार्केटिंग से बढ़ा कारोबार*

फेडरेशन की सदस्य रीना चौहान बताती हैं कि समूह द्वारा तैयार सरसों तेल की बिक्री अब ऑनलाइन माध्यमों से भी की जा रही है। ‘हिलसम’ वेबसाइट के जरिए उपभोक्ताओं तक उत्पाद सीधे पहुंच रहा है। इसके अलावा विकास भवन, सरकारी कार्यक्रमों तथा विभिन्न सीएलएफ केंद्रों के माध्यम से भी उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि यूनिट की जियो-मैपिंग की प्रक्रिया भी प्रगति पर है, जिससे भविष्य में उपभोक्ता सीधे यूनिट तक पहुंचकर उत्पाद खरीद सकेंगे।


*महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी यह पहल*

रीना चौहान का कहना है कि REAP परियोजना ने ग्रामीण महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और पहचान भी प्रदान की है। आज महिलाएं स्वयं उत्पादन से लेकर विपणन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।


*आत्मनिर्भर गांव की ओर मजबूत कदम*

जिला परियोजना प्रबंधक रीप, सोनम गुप्ता के अनुसार कालसी ब्लॉक में स्थापित यह सरसों तेल यूनिट ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजार, हाउस ऑफ हिमालय, विकास भवन तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।


यह पहल मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड और महिला सशक्तिकरण के विजन को धरातल पर साकार करती दिखाई दे रही है। हरीपुर की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अवसर और संसाधन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा भी बन सकती हैं।


देहरादून;

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 प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में 3 से 5 जून 2026 तक आयोजित *BRICS Disaster Risk Reduction (DRR)* working group की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की मुक्त कंठ से सराहना की गई।


तीन दिवसीय इस अहम बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।


सम्मेलन में विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने नवाचार और सफल मॉडल साझा किए। इसी क्रम में *उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार* ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। दोनों अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर विस्तृत प्रस्तुति दी।


प्रस्तुति के दौरान उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों, सड़क अवरोध और तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों को विस्तार से रखा गया। साथ ही राज्य में विकसित बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।


विशेष रूप से *सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा* प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में सामने रखा गया। सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।


बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण उपायों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विशेष सराहना की गई। वहीं, उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट आपदा प्रतिक्रिया मॉडल के रूप में रेखांकित किया गया।


सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने कहा, “ _मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आपदा प्रबंधन को लेकर संवेदनशील और सक्रिय दृष्टिकोण के कारण राज्य में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।”_ 


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए पूर्व तैयारी, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।


आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में राज्य में संचालित गतिविधियों को भी प्रतिनिधियों के साथ साझा किया गया। यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार ने कहा, “ _भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी तंत्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। भविष्य की आपदा चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान निर्णायक भूमिका निभाएंगे।”_ 


सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में ब्रिक्स देशों के बीच आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग को मजबूत करना, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना, सामुदायिक स्तर पर तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए साझा रणनीतियां विकसित करना और वैश्विक आपदा प्रबंधन सहयोग को नई दिशा देना शामिल रहा।


 *BRICS Disaster Risk Reduction (DRR)* working group की बैठक में उत्तराखंड के मॉडल को मिली सराहना को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह *उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ* और अन्य एजेंसियों के सतत प्रयासों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।


सिलीगुड़ी : 

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वीर सावरकर जयंती के पावन अवसर पर फिल्ममेकर एवं लेखक श्रेय राजदेव द्वारा लिखित पुस्तक “मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का” का विमोचन नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी परिसर, सिलीगुड़ी में किया गया।

इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथि, बुद्धिजीवी, समाजसेवी एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी ने वीर सावरकर के विचारों एवं राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से रत्नेश त्यागी, नरेंद्र प्रसाद, अमरेंद्र पांडेय, बिनायक सुंदास, नंद किशोर गोयल, अधिराज, अमित सहित कई प्रतिष्ठित अतिथि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पुस्तक विमोचन के दौरान श्रेय राजदेव ने कहा कि यह पुस्तक एक स्वयंसेवक की यात्रा, अनुभवों और वैचारिक समझ को दर्शाती है। पुस्तक में सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रवाद, सामाजिक एकता और भारतीय मूल्यों जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति एवं सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान साहित्य, राष्ट्र निर्माण तथा वीर सावरकर की विचारधारा पर चर्चा की गई। उपस्थित अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए लेखक को शुभकामनाएं दीं और पुस्तक को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी का वातावरण देशभक्ति एवं सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम का समापन अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के बीच संवाद, चर्चा एवं स्मृति चित्रों के साथ हुआ।

 उत्तराखंड की वीरभूमि अल्मोड़ा के वीर सपूत लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।



उनका अदम्य साहस, कर्तव्यपरायणता एवं राष्ट्रसेवा के प्रति अटूट समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्र उनकी वीरता, त्याग और बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।


जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवादियों की तलाश में चलाए जा रहे सेना के विशेष सर्च अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान अल्मोड़ा के पांच असम रजिमेंट के युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के बलिदान होने की दुखद सूचना से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।


मात्र 24 वर्ष की आयु में देश सेवा करते हुए उनका बलिदान क्षेत्र के लिए गर्व और पीड़ा दोनों का विषय बन गया है। राजौरी के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में चल रहे अभियान के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी गहरी खाई में फिसल गए। गंभीर चोटों के कारण उन्होंने वीरगति प्राप्त की। 


रविवार की दोपहर तीन बजे बलिदानी का पार्थिव शरीर आर्मी हेलीपैड पहुंचा। जहां सैनिकों ने उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इस दौरान कई लोग मौजूद थे जिन्होंने अपने क्षेत्र के वीर जवान को नमन किया और उनके वीरता के जयकारे लगाए।


कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से बगवालीपोखर क्षेत्र के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में पांडेखोला में निवास करता है। उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व माता सरस्वती देवी बल्सा, हवालबाग में शिक्षका के पद पर कार्यरत है।


बलिदानी का एक बड़ा भाई अमित गोस्वामी है जो सरकारी विभाग में कार्यरत है। कम उम्र में सेना में अधिकारी बनने वाले बीरेश्वर अपनी प्रतिभा, अनुशासन और देशभक्ति के लिए जाने जाते थे।


सैन्य कल्याण अधिकारी सेवानिवृत्त विजय मनराल ने बताया कि बलिदानी बीरेश्वर गोस्वामी काे सैन्य सम्मान दिया गया है। 


 टिहरी गढ़वाल:





आज दिनांक 07 जून 2026 को प्रातः लगभग 08:30 बजे डीसीआर टिहरी के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि तोताघाटी के समीप एक बस दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क पर पलट गई है। सूचना प्राप्त होते ही निरीक्षक कवीन्द्र सजवान के नेतृत्व में SDRF पोस्ट ढालवाला एवं ब्यासी की टीमों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।


घटनास्थल पर पहुंचने पर पाया गया कि बद्रीनाथ से ऋषिकेश की ओर आ रही चारधाम यात्रा बस संख्या UK04 PA 0418 सड़क पर ही पलट गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस के ब्रेक फेल होने के कारण यह दुर्घटना हुई। बस में कुल 39 यात्री सवार थे।


दुर्घटना में 03 से 04 यात्रियों को सामान्य चोटें आईं, जिन्हें 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से उपचार हेतु ऋषिकेश अस्पताल भेजा गया। शेष सभी यात्री सुरक्षित हैं।


SDRF टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया तथा स्थानीय प्रशासन एवं अन्य आपातकालीन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक सहायता प्रदान की गई।

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